Sunday, 5 November 2017

3. धातु और अधातु

3. धातु और अधातु


परिचय


धातु (Metals) : 
धातुओं के भौतिक गुण (Physical Properties of metals): 
(i)  धातु ठोस और चमकीले होते हैं |
(ii) ये ऊष्मा और विद्युत के सुचालक होते हैं |
(iii) धातुएँ तन्य होती हैं |
(iv) धातुएँ अघातवर्ध्य होती है |
(v) धातुएँ ध्वानिक होती हैं |
अघातवर्ध्यता (Meliability): कुछ धातुएँ पतली चादरों में फैलाई जा सकती है, इस गुण को अघातवर्ध्यता कहते हैं |
तन्यता (Ductility) :  धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहते हैं|
All metals have hight melting point. सिल्वर तथा कॉपर ऊष्मा के सबसे अच्छे चालक हैं।इनकी तुलना में लेड तथा मर्करी ऊष्मा के  कुचालक हैं।
 PVC का पूरा नाम : पॉलिवाइनिल क्लोराइड(PVC)
PVC तथा रबड़ जैसी सामग्री ऊष्मा तथा विद्युत के  कुचालक हैं।
ध्वनिक (Sonorous) : धव्निक धातु का एक भौतिक गुण है| इस गुण से वे हड़ताली पर ध्वनि पैदा करते हैं। धातुओं की इस गुण का उपयोग से , स्कूल की घंटी बनाई गई है।
अधातु (Non-metals):
कार्बन, सल्फर, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन और आयोडीन अधातु हैं।
अधातु के भौतिक गुण (Physical Properties of metals):  
(i)  धातु ठोस और चमकीले नहीं होते हैं |
(ii) ये ऊष्मा और विद्युत के सुचालक नहीं होते हैं |
(iii) धातुएँ तन्य नहीं होती हैं |
(iv) धातुएँ अघातवर्ध्य नहीं होती है |
(v) धातुएँ ध्वानिक नहीं होती हैं अर्थात पीटने पर ध्वनि नहीं निकालती हैं |
अधातुएँ ब्रोमिन को छोड़कर या तो ठोस होती है या गैस, ब्रोमिन तरल होता है |
धातु और अधातुओं का कुछ अन्य गुणधर्म :
(i) सभी धातुये मर्करी (पारा) को छोड़कर कमरे के ताप पर ठोस अवस्था में पाई जाती हैं |
(ii) मर्करी (पारा) कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाया जाता है |
(iii)  गैलियम और सीजियम दो ऐसी धातुएँ हैं जो जिनका गलनांक बहुत कम होता है, इन्हें हथेली पर रखते ही पिघल जाती हैं |
(iv)  आयोडीन एक अधातु है परन्तु यह चमकीला होता है |
(v)  क्षार धातुएँ (लिथियम, सोडियम और पोटैशियम ) इतना मुलायम होती है कि इन्हें चाकू से काटा जा सकता है | इनका घनत्व और गलनांक कम होता है |
कार्बन और इसके अपररूप (Carbon And its Allotropes):
कार्बन एक अधातु है जो अलग-अलग रूपों में पाया जाता है | इसके प्रत्येक रूप कोकार्बन का अपररूप कहा जाता है |
कार्बन के अपररूप (Allotropes of carbon):
(i) हीरा (Daimond)
(ii) ग्रेफाइट (Graphite)
(iii) बुक्मिन्टरफुलेरिन (Buckminsterfullerene)
(i) हीरा (Diamond)  यह कार्बन  का एक अपररूप है और अब तक का ज्ञात सबसे कठोर पदार्थ है | इसका क्वथनांक और गलनांक बहुत ही अधिक होता है |
(ii) ग्रेफाइट (Graphite) यह कार्बन का एक अन्य अपररूप है जो विद्युत का बहुत ही अच्छा चालक है |
(iii) बुक्मिन्टरफुलेरिन (Buckminsterfullerene) यह कार्बन का एक अन्य अपररूप है जो 60 कार्बन के अणुओं से बना है | इसकी संरचना फुटबॉल की तरह होता है | 
नोट: अधिकांश अधातुये पानी में घुलने पर अम्लीय ऑक्साइड बनाती है जबकि धातुएँ पानी में घुलकर क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं | 


धातुओं का रासायनिक गुणधर्म 

(i)  सभी धातुये ऑक्सीजन के साथ मिलकर धातु ऑक्साइड बनाती हैं |
धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड
उदाहरण के लिए, जब कॉपर को वायु में गर्म किया जाता है तो यह ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर कॉपर (II) ऑक्साइड बनाता है जो कि एक काला ऑक्साइड है |
2Cu     +    O2    →    2CuO
(कॉपर)     ऑक्सीजन   (कॉपर(II) ऑक्साइड)
इसीप्रकार, एल्युमीनियम एल्युमीनियम ऑक्साइड बनाता है |
4Al     +    3O2      →        2Al2O3
(एल्युमीनियम)              (एल्युमीनियम ऑक्साइड)
उभयधर्मी (Amphoteric Oxides) : कुछ धातु ऑक्साइड्स जैसे एल्युमीनियम ऑक्साइड एवं जिंक ऑक्साइड इत्यादि अम्लीय तथा क्षारकीय व्यवहार को प्रदर्शित करते हैं | ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्ल और क्षारक दोनों के साथ के साथ अभिक्रिया कर लवण और जल का निर्माण करते हैं इन्हें उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं | 
उदाहरण: एल्युमीनियम ऑक्साइड एवं जिंक ऑक्साइड इत्यादि |
धातु ऑक्साइड का अम्ल के साथ अभिक्रिया (Reaction of Metal oxides with acids)
एल्युमीनियम ऑक्साइड हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कर एल्युमीनियम क्लोराइड का लवण और जल देता है |
इस अभिक्रिया का समीकरण इस प्रकार है :
Al2 O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O
धातु ऑक्साइड का क्षारक के साथ अभिक्रिया (Reaction of Metal oxides with bases):
एल्युमीनियम ऑक्साइड सोडियम हाइड्रोऑक्साइड से अभिक्रिया कर सोडियम एलुमिनेट और जल प्रदान करता है :
इस अभिक्रिया का समीकरण इस प्रकार है :
Al2O3    +    2NaOH      →       2NaAlO2    +     H2O
                                      (सोडियम एलुमिनेट)
धातु ऑक्साइड्स का जल में धुलनशीलता (Solubility of metal oxides in water):
अधिकांश धातु ऑक्साइड्स जल में अधुलनशील होते हैं, परन्तु इनमें से कुछ जल में घुलकर क्षार (alkalis) बनाते हैं | सोडियम ऑक्साइड और पोटैशियम ऑक्साइड दो ऐसे ऑक्साइड्स हैं जो जल में घुलकर क्षार बनाते हैं |
सोडियम ऑक्साइड और पोटैशियम ऑक्साइड के घुलने पर क्रमश: सोडियम हाइड्रोऑक्साइड क्षार और पोटैशियम ऑक्साइड क्षार देता है |
Na2O(s) +  H2O(l)  →  2NaOH(aq)
K2O(s)   +  H2O(l)  →  2KOH(aq)
धातुओं का ऑक्सीजन के साथ अभिक्रियाशीलता 
Reactivity of metals with oxygen: 
अलग-अलग धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर अलग-अलग अभिक्रियाशीलता प्रदर्शित करती हैं | सोना प्लैटिनम और चाँदी जैसी धातुएँ तो ऑक्सीजन से बिल्कुल ही अभिक्रिया नहीं करती है |
सोडियम और पोटैशियम का ऑक्सीजन से अभिक्रिया : 
Reaction of sodium and potassium with oxygen: 
कुछ धातुएँ जैसे सोडियम और पोटैशियम इतनी अधिक तेजी से ऑक्सीजन से अभिक्रिया करती हैं कि यदि इनको खुला छोड़ा जाये तो ये तेजी आग पकड़ लेती हैं | यही कारण है कि इनको अचानक आग लगने से बचाने के लिए इनकों किरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है |
कुछ धातु ऑक्साइड रक्षात्मक कवच बनाते हैं
Some metal oxides form protective layer:
साधारण तापमान पर धातुओं की सतहें जैसे मैग्नीशियम, एल्युमीनियम, जिंक और शीशा इत्यादि पर ऑक्साइड की पतली परत चढ़ जाती हैं | ये रक्षात्मक कवच इन्हें आगे ऑक्सीडेशन (उपचयन) से बचाता है | इसका एक बहुत बड़ा फायदा धातुओं को यह मिलता है कि ये इन ऑक्साइड्स की वजह से संक्षारित होने से बच जाती हैं |
कुछ धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया नहीं करती है:
Some metal does not react with oxygen:
गर्म करने पर आयरन का दहन तो नहीं होता है लेकिन जब बर्नर की ज्वाला में लौह चूर्ण डालते हैं तब वह तेज़ी से जलने लगता है। कॉपर का दहन तो नहीं होता है लेकिन गर्म धातु पर कॉपर (II) ऑक्साइड की काले रंग की परत चढ़ जाती है। सिल्वर एवं गोल्ड अत्यंत अधिक ताप पर भी ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।
एनोड़ीकरण (Anodising): 
ऐनोडीकरण (Anodising) ऐलुमिनियम पर मोटी ऑक्साइड की परत बनाने की प्रक्रिया है। वायु के संपर्क में आने पर ऐलुमिनियम पर ऑक्साइड की पतली परत का निर्माण होता है। ऐलुमिनियम ऑक्साइड की परत इसे संक्षारण से बचाती है। इस परत को मोटा करके इसे संक्षारण से अधिक सुरक्षित किया जा सकता है।
एलुमिनियम का एनोड़ीकरण (Anodising of Aluminium) : 
During anodising, a clean aluminium article is made the anode and is electrolysed with dilute sulphuric acid. The oxygen gas evolved at the anode reacts with aluminium to make a thicker protective oxide layer. This oxide layer can
be dyed easily to give aluminium articles an attractive finish.
Reaction of metals with water:
Metals react with water and produce a metal oxide and hydrogen gas. Metal oxides that are soluble in water dissolve in it to further form metal hydroxide.
General equations:
Metal + Water → Metal oxide + Hydrogen
Metal oxide + Water → Metal hydroxide
Reaction of sodium and potassium with cold water:
Metals like potassium and sodium react violently with cold water. In case of sodium and potassium, the reaction is so violent and exothermic that the evolved hydrogen immediately catches fire.
2K(s) + 2H2O(l) → 2KOH(aq) + H2(g) + heat energy
2Na(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2(g) + heat energy
Reaction of calcium with water:
The reaction of calcium with water is less violent. The heat evolved is not sufficient for the hydrogen to catch fire.
Ca(s) +  2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + H2(g)
Calcium starts floating because the bubbles of hydrogen gas formed stick to the surface of the metal.
Reaction of metals with hot water:
Magnesium does not react with cold water. It reacts with hot water to form magnesium hydroxide and hydrogen. It also starts floating due to the bubbles of hydrogen gas sticking to its surface.
Reaction of metals with steam:
Metals like aluminium, iron and zinc do not react either with cold or hot water. But they react with steam to form the metal oxide and hydrogen.
2Al(s) + 3H2O(g) → Al2O3(s) + 3H2(g)
3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)
Some Metals do not react with water:
Metals such as lead, copper, silver and gold do not react with water at all.
Reaction of metals with Acids:
Metals react with acids give corresponding salt and hydrogen gas.
Metal + Dilute acid → Salt + Hydrogen
Hydrogen gas is not evolved when a metal reacts with nitric acid. It is
because HNO3 is a strong oxidising agent. It oxidises the H2 produced to
water and itself gets reduced to any of the nitrogen oxides (N2O, NO,
NO2). But magnesium (Mg) and manganese (Mn) react with very dilute
HNO3 to evolve H2 gas.
Aqua regia: is a freshly prepared mixture of concentrated hydrochloric acid and concentrated nitric acid in the ratio of 3:1.
It can dissolve gold, even though neither of these acids can do so alone. Aqua regia is a highly corrosive, fuming liquid. It is one of the few reagents that is able to dissolve gold and platinum.
Reaction of metals with other metal salt: 
Highly reactive metals can displace less reactive metals from their compounds in solution or molten form. this is called displacement reaction.
Metal A + Salt solution of B → Salt solution of A + Metal B
The Reactivity Series: 
K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au
Reaction with metals and non-metals: 
Mostly Metals form cation (postive charge) nad non-metals form anaion (negative charge).
Cation And Anaion : To understand these both cation and anaion, we have to understand electronic configuration of elements and their valencies.
Valency : The number of valence electrons present in the outer most shells of an atom is known as valency. Ex. Electronic configuration of Sodium (Na) is
2    8     1
There are three shells in sodium atom and the outer most shell has 1 electron can be shared, so valence electron of sodium is 1.
  • If outer most shell has 1, 2, 3 or 4 electrons these can be given in sharing of electrons. so 1, 2, 3, and for will be valance electrons.
  • If outer most shell has 5, 6 or 7 electrons these can not be given in sharing of electrons as These need electrons to complete their octet. 
  Required valance electrons for outer most shell having 5 electrons = 8 - 5 = 3
  Required valance electrons for outer most shell having 6 electrons = 8 - 6 = 2
  Required valance electron for outer most shell having 7 electrons = 8 - 7 = 1
   
Type of element
Element
Atomic Number
Number of electron in shells
   K      L        M         N  
   Noble gases Helium (He)
 Neon (Ne)
 Argon (Ar) 
     2
    10
    18
  2  
  2       8
  2       8         8  
   Metals Sodium (Na)
Magnesium (Mg)
Aluminium (Al)
Potassium (K)
Calcium (Ca)
      11
      12
      13
      19
      20
  2       8         1
  2       8         2
  2       8         3
  2       8         8          1
  2       8         8          2
  Non- metalsNitrogen (N)
Ogygen (O)
Flurine (F)
Phosphorus (P)
Sulpher (S)
Chlorine (Cl) 
      7
      8
      9
      15
      16
      17
  2       5
  2       6
  2       7
  2       8        5
  2       8        6
  2       8        7  

A sodium atom has one electron in its outermost shell. If it loses the electron from its M shell then its L shell now becomes the outermost shell and that has a stable octet. The nucleus of this atom still has 11 protons but the number of electrons has become 10, so there is a net positive charge giving us a sodium cation Na+ . On the other hand chlorine has seven electrons in its outermost shell and it requires one more electron to complete its octet. If sodium and chlorine were to react, the electron lost by sodium could be taken up by chlorine.
After gaining an electron, the chlorine atom gets a unit negative charge, because its nucleus has 17 protons and there are 18 electrons in its K, L and M shells. This gives us a chloride anion C1-. So both these elements can have a give-and-take relation between them.
E.g : 
Na   →  Na+ + e-
2,8,1     2,8
               (Sodium cation)
Cl      + e- → Cl-
2,8,7             2,8,8
                   (Chloride anion)
Ionic Compounds: The compounds formed in this manner by the transfer of electrons from a metal to a non-metal are known as ionic compounds or
electrovalent compounds.
Properties Of Ionic Compound :
(i) Physical nature: Ionic compounds are solids and are somewhat hard because of the strong force of attraction between the positive and negative ions. These compounds are generally brittle and break into pieces when pressure is applied.
(ii) Melting and Boiling points: Ionic compounds have high melting and boiling points (see Table 3.4). This is because a considerable amount of energy is required to break the strong inter-ionic attraction.
(iii) Solubility: Electrovalent compounds are generally soluble in water and insoluble in solvents such as kerosene, petrol, etc.
(iv) Conduction of Electricity: The conduction of electricity through a solution involves the movement of charged particles. A solution of an ionic compound in water contains ions, which move to the opposite electrodes when electricity is passed through the solution. 
Ionic compounds in the solid state do not conduct electricity because movement of ions in the solid is not possible due to their rigid structure. But ionic compounds conduct in the molten state. This is possible in the molten state since the elecrostatic forces of attraction between the oppositely charged ions are overcome due to the heat. Thus, the ions move freely and conduct electricity.

(NEXT PAGE IS UNDER CONSTRUCTIONS................)

2. अम्ल, क्षार एवं लवण

2. अम्ल, क्षार एवं लवण


संसूचक: 
वे पदार्थ जो अपने रंग में परिवर्तन कर दुसरे पदार्थों के साथ अम्लीय या क्षारकीय व्यवहार करते हैं उन्हें संसूचक कहा जाता है |
संसूचक के प्रकार : वैसे तो संसूचक बहुत प्रकार के होते है | परन्तु इनके समान्य प्रकार इस प्रकार है :
(i) प्राकृतिक संसूचक (Natural Indicator) : वे सूचक जो प्राकृतिक स्रोतों के प्राप्त होते है प्राकृतिक संसूचक कहलाते है | जैसे - लिटमस, हल्दी, चाइना रोज, लाल गोभी आदि |
लिटमस : लिटमस विलयन बैंगनी रंग का रंजक होता है जो थैलाफाइटा समूह के लाईकेन (Lichen) के पौधे से निकला जाता है | लिटमस विलयन जब न तो अम्लीय होता है न ही क्षारकीय, तब इसका रंग बैगनी होता है |
लिटमस पत्र : लिटमस पत्र दो रंगों का होता है -
नीला एवं लाल |
अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता  है जबकि क्षार लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है |
हल्दी :  हल्दी भी एक अन्य प्रकार का प्राकृतिक सूचक है | यह पीला रंग का होता है, कई बार आपने देखा होगा जब किसी सफ़ेद कपड़ों पर सब्जी का दाग लग जाता है और जब इसे साबुन (क्षारीय प्रकृति) से धोते है तो यह उस दाग के धब्बे को भूरा-लाल कर देता है |
  • अम्ल के साथ हल्दी के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता है |
  • क्षारक के साथ इसका रंग भूरा-लाल हो जाता है | 

(ii) संश्लेषित संसूचक (Synthetic Indicator) : ये वे सूचक है जो प्राकृतिक नहीं होते अपितु ये रसायनिक पदार्थों द्वारा बनाए गए होते है | जैसे - मेथिल ऑरेंज एवं फिनोल्फ्थेलीन आदि | इनका उपयोग अम्ल एवं क्षारक की जाँच के लिए होता है |
(iii) गंधीय संसूचक (Olfactory Indicator): कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में बदल जाती है | ऐसे पदार्थों को गंधीय (Olfactory) सूचक कहते हैं | जैसे - वैनिला, प्याज एवं लौंग आदि |
(iv) सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator) : सार्वत्रिक सूचक अनेक सूचकों का मिश्रण होता है | लिटमस, मेथिल ऑरेंज एवं फिनोल्फ्थेलीन आदि जैसे सूचकों के उपयोग से किसी विलयन के केवल अम्लीय या क्षारीय प्रकृति का ही पता लगाया जा सकता है परन्तु इस सार्वत्रिक सूचक के प्रयोग से अम्ल या क्षारक की प्रकृति के साथ-साथ उनकी प्रबलता की माप का माप भी बताता है |

अम्ल एवं क्षारक का रासायनिक गुणधर्म-

अम्ल की धातु धातु से अभिक्रिया (Reaction with acids and metals): 
अम्ल धातु से अभिक्रिया कर संगत धातु की लवण और हाइड्रोजन गैस प्रदान करता है : 
   अम्ल          +              धातु       →             लवण           +         हाइड्रोजन गैस  
जिंक के साथ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया से जिंक क्लोराइड और हाइड्रोजन गैस बनता है |
 2 HCl          +                Zn           →           ZnCl2          +              H2
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल       जिंक             जिंक क्लोराइड                    हाइड्रोजन गैस'
सोडियम के साथ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया से सोडियम क्लोराइड और हाइड्रोजन गैस बनता है | 
2 HCl           +            2 Na          →     2NaCl               +                H2
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल        सोडियम               सोडियम क्लोराइड                हाइड्रोजन गैस 
धातु जिंक की सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया से जिंक सल्फेट और हाइड्रोजन गैस का निर्माण होता है | 
H2 SO4        +            Zn             →     ZnSO4              +                H2  
सल्फ्यूरिक अम्ल       जिंक               जिंक सल्फेट                   हाइड्रोजन गैस  

हाइड्रोजन गैस की जाँच (Testing of Hydrogen Gas): 
जब हम किसी धातु का किसी अम्ल से अभिक्रिया कराते है तो यह संगत लवण और हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है | अभिक्रिया के इस अवधि के दौरान, जब हम एक जलती हुई मोमबत्ती इस गैस के पास ले जाते है तो यह पॉप ध्वनि उत्पन्न होती है | पॉप ध्वनि यह बताती है कि उत्पन्न गैस हाइड्रोजन है | 

धातु कार्बोनेट/धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अम्ल की अभिक्रिया (Reaction of Metal Carbonate/Metal Hydrogencarbonate with Acids):
चूनापत्थर, चाक और संगमरमर कैल्शियम कार्बोनेट के विभिन्न रूप है | सभी धातु कार्बोनेट और हाइड्रोजनकार्बोनेट अम्ल के साथ अभिक्रिया कर संगत लवण, कार्बन डाइऑक्साइड और जल प्रदान करता है | 
इस अभिक्रिया का समान्य रूप इस प्रकार है : 
धातु कार्बोनेट + अम्ल  → लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल
उदाहरण: 
कैल्शियम क्लोराइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कर कैल्शियम क्लोराइड, कार्बन डाइऑक्साइड और जल प्रदान करता है |  
CaCO3            +                2HCl              →         CaCl2      +        CO2        +       H2O
(कैल्शियम कार्बोनेट)         (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)              (कैल्शियम क्लोराइड)  (कार्बन डाइऑक्साइड)   (जल)  
नाइट्रिक अम्ल, सोडियम कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया कर सोडियम नाइट्रेट, कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनाता है | 
2NHO3       +       Na2CO3      →       NaNO3        +        CO2         +      2H2O
(नाइट्रिक अम्ल)        (सोडियम कार्बोनेट )       (सोडियम नाइट्रेट)    (कार्बन डाइऑक्साइड )     (जल)

इसी प्रकार ये निम्न अभिक्रिया भी संपन्न होगी ;

सोडियम कार्बोनेट  +  हाइड्रोक्लोरिक अम्ल →  सोडियम क्लोराइड + कार्बन डाइऑक्साइड   +  जल

कैल्शियम कार्बोनेट + सल्फ्यूरिक अम्ल   →  कैल्शियम सल्फेट  + कार्बन डाइऑक्साइड   +  जल


धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट और अम्ल की अभिक्रिया (Reaction of Metal hydrogencarbonate With Acids): 
 

समान्य सूत्र (General Formulla); 
 

धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट (बाईकार्बोनेट)  + अम्ल  लवण  +   कार्बनडाइऑक्साइड  +   जल 
 

उदाहरण: 

सोडियम बाईकार्बोनेट, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया कर सोडियम क्लोराइड, कार्बन डाइऑक्साइड, और जल बनाता है |   
NaHCO3        +      2HCl     
      NaCl      +    CO2   +     H2O
(सोडियम बाईकार्बोनेट)   (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)    (सोडियम क्लोराइड)   (कार्बन डाइऑक्साइड)     (जल)

धातु एवं क्षारक की अभिक्रिया (Reaction with bases and Metals): 

क्षारक धातुओं से अभिक्रिया कर संगत धातु का लवण और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं |  
सोडियम हाइड्रोऑक्साइड  जिंक के साथ अभिक्रिया कर सोडियम ज़िन्केट और हाइड्रोजन गैस देता है |  
2NaOH(aq)         +            Zn(s)        →           Na2 ZnO2(aq)       +         H2(g)   
(सोडियम हाइड्रोऑक्साइड)     (जिंक)                (सोडियम ज़िन्केट)          (हाइड्रोजन गैस) 
सोडियम हाइड्रोऑक्साइड  एल्युमुनियम के साथ अभिक्रिया कर सोडियम एलुमिनेट और हाइड्रोजन गैस देता है |
2NaOH(aq)        +       2 Al (s)  +  2H2O      →       2 NaAlO2(aq)          +      2H2(g)   
(सोडियम हाइड्रोऑक्साइड)   (एल्युमीनियम)  (जल)        (सोडियम एलुमिनेट)             (हाइड्रोजन गैस) 

उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralisation Reaction):

अम्ल और क्षारक की आपसी अभिक्रिया से लवण और जल का निर्माण होता है इस प्रकार की अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं | 
The reaction between an acid and a base to give a salt and water is known as a neutralisation reaction.
उदासनिकरण अभिक्रिया को समान्य सूत्र में इस प्रकार से लिखा जाता है : 
क्षारक    +    अम्ल        →      लवण     +     जल
अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया (Reaction With Acids and Bases): 
सोडियम हाइड्रोऑक्साइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया कर साधारण नमक और जल बनाता है | 
NaOH(aq)           +           HCl(aq)       →      NaCl(aq)         +         H2O(l)
(सोडियम हाइड्रोऑक्साइड)         (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)       (सोडियम क्लोराइड)                         (जल) 
सोडियम हाइड्रोऑक्साइड, नाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया कर सोडियम नाइट्रेट और जल बनाता है | 
NaOH(aq)          +          HNO3 (aq)      →    NaNO3 (aq)    +     H2O (l)
(सोडियम हाइड्रोऑक्साइड)         (नाइट्रिक अम्ल)                  (सोडियम नाइट्रेट)                 (जल)  
सोडियम हाइड्रोऑक्साइड, सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया कर सोडियम सल्फेट और जल बनाता है | 
NaOH(aq)         +            H2SO4​         →     NaSO4(aq)       +   H2O(l) 
(सोडियम हाइड्रोऑक्साइड)         (सल्फ्यूरिक अम्ल)                  (सोडियम सल्फेट)                 (जल)  

धातु-ऑक्साइड का अम्लों के साथ अभिक्रिया (Reaction of Metal-oxides with acid):
​सभी धातु-ऑक्साइड क्षारकीय प्रकृति की होती हैं इसलिए ये अम्ल के साथ अभिक्रिया कर लवण एवं जल बनाती है यह बिल्कुल उदासीनीकरण अभिक्रिया की तरह ही होती है | 
आयरन  (III) ऑक्साइड सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया कर आयरन सल्फेट और जल बनाता है | 
Fe2O3         +        3 H2SO4            →           Fe2 (SO4)3      +        3 H2
(फेरस III ऑक्साइड)       (सल्फ्यूरिक अम्ल)                             ( फेरस सल्फेट)                        (जल)
कॉपर ऑक्साइड हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया कर कॉपर क्लोराइड एवं जल प्रदान करता है | 
CuO            +          2HCl                 →           CuCl2             +         H2O
(कॉपर ऑक्साइड)    (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)                         (कॉपर क्लोराइड)                         (जल)
कैल्शियम ऑक्साइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया कर कैल्शियम क्लोराइड एवं जल प्रदान करता है |    
CaO(aq)       +    2HCl(aq)        →         CaCl(aq)     +       H2​O(l)
(कैल्शियम ऑक्साइड)    (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)             (कैल्शियम क्लोराइड)              (जल) 

क्षारक और अधातु ऑक्साइड का अभिक्रिया : 
अधातुओं की प्रकृति अम्लीय होती है जो क्षारक से अभिक्रिया कर लवण एवं जल बनाता है, यह अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया के समान ही होता हैं | 
क्षारक         +         अधात्विक ऑक्साइड        →      लवण            +         जल 
सोडियम हाइड्रोक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड से अभिक्रिया कर सोडियम कार्बोनेट और जल देता है | 
2NaOH(aq)    +          CO2 (g)                  →      Na2CO3(s)    +       H2O
(सोडियम हाइड्रोक्साइड)    (कार्बन ऑक्साइड)                               (सोडियम कार्बोनेट)              (जल )

लवण (Salts):  

लवण : लवण अम्ल एवं क्षारक के उदासीनीकरण अभिक्रिया का आयनिक उत्पाद है |
(i) अम्लीय लवण : अम्लीय लवण प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षारक के आपसी अभिक्रिया के फलस्वरूप प्राप्त होता है | 
अम्लीय लवण (Acidic Salt): NH4Cl 
HCl                +       NH4​OH          →        NH4Cl          +     H2O
प्रबल अम्ल             दुर्बल क्षारक               अम्लीय लवण  

(ii) उदासीन लवण :  उदासीन लवण प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षारक के आपसी अभिक्रिया से प्राप्त होता है | 
उदासीन लवण (Neutral Salt): NaCl  
HCl          +       NaOH          →           NaCl        +          H2
प्रबल अम्ल      प्रबल क्षारक              उदासीन लवण  
(iii) क्षारकीय लवण :  क्षारकीय लवण प्रबल क्षारक एवं दुर्बल अम्ल की आपसी अभिक्रिया से प्राप्त  होता है | 
क्षारकीय लवण (Basic Salt): NaC2H3O2 
HC2H3O2           +    NaOH           →       NaC2H3O2     +     H2
दुर्बल अम्ल            प्रबल क्षारक                  क्षारकीय लवण  
 

तनुकरण : जल में अम्ल या क्षारक मिलाने पर आयन की सांद्रता (H3O+/OH-) में प्रति इकाई आयतन में कमी हो जाती है | इस प्रक्रिया तो तनुकरण कहते हैं | अम्ल और क्षारक को तनुकृत किया जाता है | 
pH स्केल : 
किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए एक स्केल विकसित किया गया है जिसे pH स्केल कहते हैं | इस स्केल में 1 से 14 तक अंक अंकित रहते है जो किसी अम्ल या क्षारक की प्रबलता और दुर्बलता के साथ-साथ उनके मान की बताता है | 
यह एक प्रकार का सार्वत्रिक सूचक होता है | 
  • हाइड्रोनियम आयन की सांद्रता जीतनी अधिक होगी उसका pH उतना ही कम होगा | 
  • किसी भी उदासीन विलयन के pH का मान 7 होगा | 
  • यदि pH स्केल में किसी विलयन का मान 7 से कम है तो यह अम्लीय होगा | 7 से कम होने पर H+ आयन की सांद्रता बढती  है | अर्थात अम्ल की शक्ति बढ़ रही है | 
  • यदि pH का मान 7 से अधिक है वह क्षार होगा | 7 से अधिक होने पर OH- की सांद्रता बढती है अर्थात क्षारक की शक्ति बढ़ रही है |  
प्रबल अम्ल : जिस विलयन में अधिक संख्या में H+ आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल प्रबल अम्ल कहलाते हैं | 
दुर्बल अम्ल: जबकि कम H+ आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल दुर्बल अम्ल कहलायेंगे | 
प्रबल क्षारक : 
दुर्बल क्षारक : 
Our blood must maintain a pH around 7.35-7.45.  If the pH is above 7.45 you would have a condition called alkalosis.  If the pH is below 7.35, then one would suffer from acidosis.

Chlor-Alkali Process:

When electricity is passed through an aqueous solution of sodium chloride (called brine), it decomposes to form sodium hydroxide. The process is called the chlor-alkali process.
This process is taken place by electrolysis of aqueous sodium chloride. 
The chemical equation of this process is as folllow:
2NaCl(aq) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + Cl2 (g) + H2(g) 
When electricity is passed through an aqueous solution of sodium chloride (called brine), Chlorine gas is given off at the anode, and hydrogen gas at the cathode. Sodium hydroxide solution is formed near the cathode.
Products of chlor-alkali Process: 
(1)  Sodium Hydroxide
(2)  Chlorine Gas
(3)  Hydrogen Gas

Uses of Sodium Hydroxide : 
(i)   It is used for de-greasing Metals.
(ii)  In soaps and detergents.
(iii)  In Paper making. 
(iv)  For making of artificial fibres.

Uses of Chlorine gas: 
(i)    It is used In water treatment.
(ii)  In swimming pool. 
(iii) In manufactoring of PVC, CFCs and pesticides.
(iv) It is also used as disinfectants.

Uses of hydrogen:
(i)    It is used as fuels.
(ii)   It is used in Margarine. 
(iii)  In manufactoring of ammonia for fertilisers. 

Production of Hydrochloric acid: Chlorine and Hydrogen are the main products of chlor-alkali process. These are used for production of Hydrochloric acids. Hydrochloric acid is important chemical product which is used in manufacturing of medicines, cosmetics and ammonium chloride and also used for cleaning steel. 
Production of Bleaching powder: Bleaching powder is produced by the action of chlorine on dry slaked lime [Ca(OH)2]. This chlorine gas is obtained from electrolysis of aqueous sodium chloride of chlor-alkali process
The chemical equation of this process is 
Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O
Bleaching powder is used –
(i) for bleaching cotton and linen in the textile industry, for bleaching wood pulp in paper factories and for bleaching washed clothes in laundry;
(ii) as an oxidising agent in many chemical industries; and
(iii) for disinfecting drinking water to make it free of germs.

Production of Baking soda: 
The soda commonly used in the kitchen for making tasty crispy pakoras is baking soda. Sometimes it is added for faster cooking. The chemical name of the compound is sodium hydrogencarbonate (NaHCO3).
The chemical equation of this reaction is; 
NaCl + H2O + CO2 + NH3 →  NH4Cl         +            NaHCO3
                                            (Ammoium Chloride)     (Sodium Hydrogencarbonate) 
When Sodium hydrogencarbonate is heated during cooking it gives following products.

This reaction produces carbon dioxide which is responsible for making bread or cake risen, soft and spongy. 
When baking powder is heated or mixed in water, it gives carbon dioxide, water and Sodium salt of acid. 
The reacton is as; 
NaHCO3 + H+ → CO2 + H2O + Sodium salt of acid
Uses of sodium hydrogencarbonate (NaHCO3)
(i)  For Making Baking Powder.
(ii) Sodium hydrogencarbonate is also an ingredient in antacids. Being alkaline, it neutralises excess acid in the stomach and provides relief.
(iii) It is also used in soda-acid fire extinguishers.

1. रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण

1. रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण


Chapter Review (SHORT NOTES)


  • रसायनिक परिवर्तन को भी रसायनिक अभिक्रिया कहा जाता है |
  • रसायनिक अभिक्रिया के दो भाग होते है , (1)   अभिकारक  (2)   उत्पाद 
  • वे पदार्थ जिनमे रसायनिक अभिक्रिया के द्वारा रसायनिक परिवर्तन होता है अभिकारक कहलाते है | 
  • अभिक्रिया के दौरान नए बनने वाले पदार्थ उत्पाद कहलाते है |
  • शब्द-समीकरण में अभिकारकों के उत्पाद में परिवर्तन को उनके मध्य एक तीर का निशान लगाकर दर्शाया जाता है | 
  • तीर का सिरा उत्पाद की ओर इंगित करता है और अभिक्रिया होने की दिशा को दर्शाता है | 
  • अभिकारकों के बीच योग (+) का चिन्ह लगाकर उन्हें बाई ओर (LHS) लिखा जाता है | इसी प्रकार उत्पादों के बीच भी योग (+) चिन्ह लगाकर उन्हें दाई ओर (RHS) लिखा जाता है | 
  • शब्दों की जगह रसायनिक सूत्र का उपयोग करके रसायनिक समीकरणों को अधिक संक्षिप्त और उपयोगी बनाया जा सकता है | 
  • एक रसायनिक समीकरण एक रसायनिक अभिक्रिया का प्रतिनिधित्व करता है | 
  • प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या तीर के दोनों ओर सामान होते है | 
  • असंतुलित रसायनिक समीकरण को कंकाली समीकरण कहते है |
  • द्रव्यमान संरक्षण के नियम को संतुष्ट करने के लिए रसायनिक समीकरण को संतुलित किया जाता है |
  • द्रव्यमान संरक्षण के नियम : किसी भी रसायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का ना तो सृजन होता है ना ही विनाश होता है | 
  • किसी भी रसायनिक अभिक्रिया के उत्पाद तत्वों का कुल द्रव्यमान अभिकारक तत्वों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है |
  • रसायनिक अभिक्रिया के बाद और रसायनिक अभिक्रिया के पहले प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान रहती है | 
  • कंकाली समीकरण को Hit and trial method or inspecting method के उपयोग से संतुलित किया जा सकता है | 
  • संयोजन अभिक्रिया, वियोजन  अभिक्रिया, विस्थापन  अभिक्रिया, द्वि-विस्थापन  अभिक्रिया, उपचयन और अपचयन ये सभी रसायनिक अभिक्रिया के प्रकार है | 
  • संक्षारण और विकृत-गंधिता उपचयन  अभिक्रिया के प्रभाव के कारण होते है | 
  • एक सम्पूर्ण रसायनिक अभिक्रिया अभिकारक, उत्पाद और उनके भौतिक दशाओं को संकेतों में दर्शाता है | 
  • संयोजन अभिक्रिया में दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक एकल नया उत्पाद बनाते है | 
  • जिस अभिक्रिया में ऊर्जा का अवशोषण होता है वह ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहलाती है |
  • अवक्षेपण अभिक्रियायें अघुलनशील लवणों का उत्पादन करती है | 
  • द्वि-विस्थापन अभिक्रिया में दो भिन्न अणुओं या अणुओं के समूहों में बीच आयनों (ions) का अदान-प्रदान होता है | 
  • अभिक्रिया में पदार्थों से ऑक्सीजन या हाइड्रोजन का योग अथवा ह्रास भी होता है |
  • ऑक्सीजन का योग अथवा हाइड्रोजन का ह्रास आक्सीकरण या उपचयन कहलाता है | 
  • ऑक्सीजन का ह्रास अथवा हाइड्रोजन का योग अपचयन कहलाता है | 
  • जब कोई तत्व किसी यौगिक से किसी दुसरे तत्व को विस्थापित करता है तो विस्थापन अभिक्रिया होती है |
  •  विस्थापन अभिक्रिया में एक अधिक अभिक्रियाशील तत्व कम अभिक्रियाशील पदार्थ को विस्थापित कर देता है | जैसे आयरन जिंक और कॉपर को विस्थापित कर देता है क्योंकि आयरन  जिंक और कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है | 
  • द्वि-विस्थापन अभिक्रिया में आयनों का आदान-प्रदान होता है | 
  • हमारे भोजन में ऑक्सीजन के वृद्धि से भोजन का उपचयन तेजी से होता है जिससे वह विकृत-गंधित हो जाता है | 
  •  विकृत-गंधित पदार्थों का गंध और स्वाद बदल जाता है | 








1. रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण

रासायनिक अभिक्रिया :


वह प्रक्रिया जिससे दो या दो से अधिक उत्पाद मिलकर एक या एक से अधिक  गुणधर्म वाले नए पदार्थ का निर्माण करते है तो उसे रासायनिक अभिक्रिया कहते है | जैसे-
2H2 + O2 → 2H2O
(यहाँ हाइड्रोजन और ऑक्सीजन एक रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेकर एक नए गुणधर्म वाले पदार्थ का निर्माण करते है जो जल (H2O) है | )
दुसरे शब्दों में हम कह सकते है कि रासायनिक परिवर्तन को रासायनिक अभिक्रिया भी कहते है | हमारे आस-पास ऐसी बहुत सारी परिवर्तनें होती रहती है जैसे : 
  • वायु के संपर्क में आने से जंग का लगाना |
  • अंगूर के रस का किण्वन |
  • भोजन का पकना |
  • हमारे शारीर में भोजन का पचना |
  • हम जो श्वसन करते है |

रासायनिक अभिक्रिया की पहचान :

रासायनिक अभिक्रिया की पहचान करना ताकि यह पता लगाया जा सके कि अभिक्रिया सम्पन्न हुआ है |
जब कोई अभिक्रिया संपन्न होता है तो उसे निम्न चिन्हों से पहचाना जाता है |
जैसे :
  • पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन |
  • रंग में परिवर्तन |
  • गैस का निष्कासन |
  • ताप में परिवर्तन |

रासायनिक समीकरण: 

जब एक मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाया जाता है तो यह मैग्नीशियम ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है | यह एक रासायनिक अभिक्रिया के लिए कथन (statement) है, परन्तु इसे निम्न तरीके से लिखा जा सकता है |
मैग्नीशियम + ऑक्सीजन→ मैग्नीशियम ऑक्साइड
          (अभिकारक)                        (उत्पाद)
नोट: इस प्रकार समीकरणों को लिखना शब्द समीकरण कहलाता है |
रासायनिक अभिक्रिया को लिखने का दूसरा तरीका है;
Mg + O2 → MgO
रासायनिक समीकरण को लिखने का सांकेतिक तरीका है |
किसी रासायनिक अभिक्रिया के समीकरणों के दो भाग होते है |
1.  अभिकारक : वे पदार्थ जो किसी अभिक्रिया में भाग लेते है अभिकारक कहलाते है | जैसे -          ऊपर के समीकरण में मैग्नीशियम एवं ऑक्सीजन अभिक्रिया में भाग लेते है इसलिए ये            दोनों अभिकारक है |
2.  उत्पाद: किसी अभिक्रिया के दौरान नए बनने वाले पदार्थों को उत्पाद कहते है | जैसे - MgO      उत्पाद  है जो Mg और O2 के भाग लेने से नया पदार्थ बना है |

रासायनिक समीकरणों को लिखना : 

रासायनिक समीकरण एक रासायनिक अभिक्रिया को प्रदर्शित करता है | इसलिए रासायनिक समीकरण में तीर के निशान के बायीं ओर अभिकारकों को लिखा जाता है और उनके बीच में (+) चिन्ह लगाया जाता है , इसीप्रकार तीर के दाई ओर उत्पादों को लिखा जाता है और उनके बीच (+) चिन्ह लगाया जाता है |
इसको समझिये :

कंकाली रासायनिक समीकरण:

Mg + O2 → MgO
इस समीकरण को निरीक्षण कीजिए एवं  तीर के बायीं ओर और दायीं ओर के परमाणुओं की संख्या को गिनिए | प्रत्येक तत्व के दोनों ओर के अणुओं की संख्या समान नहीं है | ऑक्सीजन के परमाणुओं की संख्या थोड़ी असंतुलित है | बायीं ओर ऑक्सीजन के दो अणु है जबकि दायीं ओर सिर्फ 1 ही है |
इस प्रकार :
असंतुलित रासायनिक समीकरण को कंकाली समीकरण कहते है |
कंकाली रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना:
द्रव्यमान संरक्षण के नियम को संतुष्ट करने के लिए रासायनिक समीकरणों को संतुलित किया जाता है |  तीर के बाई ओर तथा दाई ओर ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या समान किया जाता है जिससे दोनों ओर के तत्वों के परमाणु समान हो सके |

  रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार: 


रासायनिक अभिक्रियाओं में अणुओं के बीच बंध का बनने और टूटने से नए पदार्थ का निर्माण होता है | जैसे जल के अणुओं के टूटने से ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन उत्पन्न होते  हैं जबकि कार्बन तथा ऑक्सीजन के बीच बंध बनने से कार्बन डाइऑक्साइड प्राप्त होता है |
रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार की होती है |
(i)  संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)
(ii) वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)
(iii) विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)
(iv) द्वि-विस्थापन (Double Displacement Reaction)
(v) उपचयन एवं अपचयन (Oxydation and Reduction Reaction)

1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction) 

वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारकों से एक एकल उत्पाद का निर्माण  होता है तो ऐसी अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया कहते है |
इस अभिक्रिया के लिए समान्य सूत्र:   A + B → AB
CaO(s)               +            H2O(l)         →        Ca(OH)2(aq)
कैल्शियम ऑक्साइड             जल                      कैल्शियम हाइड्रोऑक्साइड
      (चुना)                                                        (बुझा हुआ चुना)
परिभाषा के अनुसार रासायनिक समीकरण से तुलना करने पर हम देखते है कि कैल्शियम ऑक्साइड और जल जो दो अभिकर्मक है एकल उत्पाद कैल्शियम हाइड्रोऑक्साइड  बनाते हैं|

कैल्शियम हाइड्रोऑक्साइड Ca(OH)2कैल्शियम हाइड्रोऑक्साइड का उपयोग दीवारों पर सफेदी करने के लिए किया जाता है | यह एक अवक्षेपण अभिक्रिया है |  जब कैल्शियम हाइड्रोऑक्साइड से दीवारों पर पुताई की जाती है तो यह वायु में उपस्थित CO2 से अभिक्रिया करके कैल्शियम कार्बोनेट का एक पतला परत बनाता है और इसके साथ जल  (H2O) का भी निर्माण होता है जो वाष्पीकृत हो जाता है |
इस प्रक्रिया का समीकरण इस प्रकार है |
Ca(OH)2 (aq)   +   CO2(g)     CaCO3(s)  +   H2O(l)
   कैल्शियम                              कैल्शियम              
हाइड्रोऑक्साइड                           कार्बोनेट

अन्य संयोजन अभिक्रिया को देखते है |
a.  कोयले का जलना
     C(s) + O(g) → CO2(g)
b.   जल का बनना 
     2H2(g)  + O2(g) → H2O (l) 
c.   सल्फर डाइऑक्साइड का बनना 
     S(s) + O2(g) → SO2(g)
d.  जंग का लगना (फेरस ऑक्साइड का बनना )
     S(s) + O2(g) → SO2(g)

ऊष्मा के आधार पर रासायनिक अभिक्रिया के प्रकार : 

A.  ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ : वे अभिक्रियाएँ जिसमें अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा निकलती है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहलाती हैं |
उदाहरण:
a.  CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O(g)
b.  श्वसन भी एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया का उदाहरण है जिसमें कोशिकाएँ श्वसन के दौरान ऊष्मा मुक्त करती है |
c.  शाक सब्जियों या सड़े-गले घास-फूस या पेड़ों के पत्तों का विघटन होकर कम्पोस्ट का बनना |
B.  ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ : वे अभिक्रियाएँ जिसमें ऊष्मा का शोषण  होता है | ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहलाती हैं |
उदाहरण:
a.   Ba(OH)2 + 2NH4Cl  BaCl2 + 2NH4OH

2. वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) 
वे अभिक्रियाएँ जिनमें एकल अभिकारक वियोजित/विघटित होकर दो या अधिक उत्पादों का निर्माण करता है | विघटन अभिक्रियाएँ कहलाती है |
विघटन अभिक्रियाएँ तीन प्रकार के होती है |
a. ऊष्मीय वियोजन : इसमें विय&22379;जन की क्रिया ऊष्मा (Heat) के द्वारा होता है |
    उदाहरण:
b. विद्युत वियोजन : इसमें ऊष्मा विद्युत (electricity) के रूप में प्रदान की जाती है |
    उदाहरण: 
c.  प्रकाशीय वियोजन : जब वियोजन की क्रिया के लिए ऊष्मा प्रकाश के द्वारा प्रदान की जाती      हैं |
     उदाहरण: 

3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) 

   ऐसी अभिक्रियाएँ जिसमें अधिक अभिक्रियाशील पदार्थ कम अभिक्रियाशील पदार्थ को उसके यौगिक से अलग कर देता है विस्थापन अभिक्रिया कहलाती हैं |
उदाहरण 1:
Fe(s) + CuSO4(aq)     FeSO4(aq) + Cu(s)
           कॉपर सल्फेट         फेरम सल्फेट
यहाँ लोहा कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील पदार्थ है जो अपने से कम अभिक्रियाशील कॉपर को उसके यौगिक कॉपर सल्फेट से अलग कर देता है | इस अभिक्रिया में कॉपर सल्फेट का रंग नीला होता है परन्तु जैसे ही लोहे की कीलें विलयन में डालते है तो कॉपर के विस्थापन के कारण विलयन का रंग नीला से भूरा हो जाता है |
उदाहरण 2 :
Zn(s) + CuSO4(aq)  →  ZnSO(aq) + Cu(s)
           कॉपर सल्फेट       जिंक सल्फेट
उदाहरण 3 :
Pb(s) + CuCl2(aq)    →      PbCl2(aq) + Cu(s)
       कॉपर क्लोराइड              लैड क्लोराइड 
उदाहरण 2 तथा 3 में जिंक तथा लैड दोनों तत्वों ने कॉपर को अभिक्रिया में उसके यौगिक से विस्थापित कर देते है ऐसा इसलिए है क्योंकि कॉपर जिंक तथा लैड दोनों से कम अभिक्रियाशील है |
4. द्वि-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) :
ऐसी अभिक्रिया जिसमें अभिकर्कों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है द्वि-विस्थापन अभिक्रिया कहलाता है |
द्वि-विस्थापन अभिक्रिया के लिए सामान्य सूत्र:
Ab + Cd → Ad + Cb
उदाहरण:
(i) Na2SO4 + BaCl2 → BaSO4  + 2NaCl
(ii) NaOH + H2SO4 → Na2SO4 + H2O
(iii) NaCl + AgNO3 → AgCl + NaNO3
(iv) BaCl2 + H2SO4 → BaSO4 + HCl
(v) BaCl2 + KSO4 → BaSO4 + KCl2
5. उपचयन एवं अपचयन अभिक्रिया (Oxidation And Reduction): 
उपचयन (Oxidation Reaction): ऑक्सीजन की वृद्धि एवं हाइड्रोजन की कमी .
दुसरे शब्दों में:
किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की वृद्धि अथवा हाइड्रोजन का ह्रास होता है  अथवा दोनों हो तो इसे उपचयन (oxidation) कहते हैं | 
उपचयन का उदाहरण: 
ऑक्सीजन में वृद्धि के लिए -- 
(i)

[कार्बन में ऑक्सीजन की वृद्धि होती है और यह कार्बन डाइऑक्साइड में उपचयित (oxidised) होता है ]
(ii)

[फोस्फोरस में ऑक्सीजन की वृद्धि होती है एवं यह फोस्फोरस पेंटाऑक्साइड में उपचयित (oxidised) होता है |]
(iii)

[इसमें कॉपर में ऑक्सीजन की वृद्धि होती है और यह कॉपर ऑक्साइड में उपचयित (oxidised) होता है ]
हाइड्रोजन का ह्रास:  
उपचयन का उदाहरण:
(i)

[सल्फर हाइड्राइड से हाइड्रोजन का ह्रास होता है और उपचयित (oxidised)होता है |]
(ii)

[यहाँ भी सल्फर हाइड्राइड से हाइड्रोजन का ह्रास होता है और उपचयित (oxidised) होता है |]
(iii)

[यहाँ मीथेन से हाइड्रोजन का ह्रास होता है एवं यह उपचयित  (oxidised) होता है ]

अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction): ऑक्सीजन का ह्रास एवं हाइड्रोजन में वृद्धि अपचयन होता है |
दुसरे शब्दों में:
किसी पदार्थ में हाइड्रोजन की वृद्धि अथवा ऑक्सीजन का ह्रास  अथवा दोनों हो तो इसे अपचयन कहते है |
​अपचयन का उदाहरण:
(i)

(ii)

(iii)

कभी-कभी ये दोनों अभिक्रियाएँ साथ-साथ होती है :
रेडोक्स अभिक्रिया (Redox Reaction): ऐसी अभिक्रिया जिसमें अभिक्रिया के दौरान एक अभिकारक उपचयित (oxidised) होता है जबकि दूसरा अपचयित होता है उसे रेडोक्स अभिक्रिया कहते हैं |
दुसरे शब्दों में;
जब किसी अभिक्रिया के दौरान उपचयन की क्रिया एवं अपचयन की क्रिया एक साथ होता हो उसे रेडोक्स अभिक्रिया कहते हैं |
उदाहरण;

यहाँ एक ही अभिक्रियाँ में उपचयन एवं अपचयन दोनों की क्रिया हो रही है इसलिए यह रेडोक्स अभिक्रिया है | 

ऑक्सीकारक (Oxidising Agent/Oxidants/Oxidisers): 
वह पदार्थ जो उपचयन के लिए ऑक्सीजन देता है या अपचयन के लिए हाइड्रोजन को हटाता है, ऑक्सीकारक कहलाता है |
अवकारक (Reducing agent):
वह पदार्थ जो ऑक्सीजन के हटने के लिए उत्तरदायी होता है अथवा अपचयन के लिए हाइड्रोजन देता है, अवकारक कहलाता है |
उदाहरण: 

यहाँ उपरोक्त उदाहरण में CuO कॉपर ऑक्साइड का कॉपर में अपचयन (अवकरण) होता है अत: CuO (कॉपर ऑक्साइड) अपचयित पदार्थ है | चूँकि CuO (कॉपर ऑक्साइड) उपचयन के लिए ऑक्सीजन प्रदान करता है, जिससे हाइड्रोजन ऑक्सीकृत होता है अत: कॉपर ऑक्साइड ऑक्सीकारक है |
H2 हाइड्रोजन जल  H2O में आक्सीकृत होता है, अत: एवं यह ऑक्सीजन के CuO (कॉपर ऑक्साइड) से हटने के लिए उत्तरदायी है | H2 (हाइड्रोजन) एक अवकारक है |
सरांश : 
(a) उपचयित पदार्थ : H2                   // जिसमें ऑक्सीजन की वृद्धि होती है |
(b) अपचयित पदार्थ: CuO            // जिससे ऑक्सीजन का ह्रास होता है |
(c) ऑक्सीकारक :CuO                   // जो उपचयन के लिए ऑक्सीजन प्रदान करता है |
(d) अवकारक : H2              // जो ऑक्सीजन के ह्रास के लिए उत्तरदायी है |

उपचयन का प्रभाव: 
हमारे दैनिक जीवन में ऐसी बहुत सी अभिक्रियाएँ हमारे आस-पास होती रहती है जिसमें से धातुओं का संक्षारण एवं खाद्य पदार्थो का विकृतगंधित हो जाना सामान्य उदाहरण है जो उपचयन अभिक्रिया के प्रभाव से होता है |
1. संक्षारण (Corrosion): 
वह प्रक्रिया जिसमें हवा, जल एवं नमी के संपर्क में आकर धातु की सतह धीरे-धीरे ह्रास होने लगता है, इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते है |
दुसरे शब्दों में :
वह प्रक्रिया जिसमें हवा, जल एवं नमी से अभिक्रिया कर किसी धातु की सतह संक्षारित (गलना) हो जाती है तो ऐसी प्रक्रिया को संक्षारण कहते है |
नोट-**** संक्षारण एवं जंग लगना दोनों अलग चीज है, जंग लगाने से लोहे जैसी धातु की सतह संक्षारित हो जाती है |
संक्षारण से बचाव (Preventing Corrosion): 
संक्षारण से बचाव की निम्न विधियाँ हैं |
(i) जस्तीकरण (galvonisation)
(ii) धातु की सतह को पेंट करके
(iii) धातु की सतह पर तेल लगाकर या ग्रीस लगाकर 
जस्तीकरण (Galvonisation): किसी धातु की सतह पर विध्युत लेपन द्वारा जस्ते (zinc) की पतली परत चढाने की प्रक्रिया को जस्तीकरण कहते है |
2. विकृतगंधिता (Rancidity): 
भोजन में उपस्थित वसा एवं तेल का वायुजनित उपचयन जिससे उसका स्वाद एवं गंध बदल कर बदबूदार हो जाता है भोजन का इस प्रकार ख़राब होना विकृतगंधिता कहलाता है |
विकृतगंधिता एक घटना है जब बहुत समय रखने के बाद वसा/तेलीय खाद्य पदार्थ उपचयित हो जाता है जिससे उसका स्वाद बदल जाता है |
  • वसा अथवा तेल में तैयार किया गया खाद्य पदार्थ जैसे सब्जी, चिप्स, तथा भुजिया आदि को विकृतगंधित होने से ख़राब कर देता है |
  • उपचयित खाद्य पदार्थ का स्वाद बदल जाता है |
  • विकृत गंधित भोजन खाने योग्य नहीं होता है |  
Preventing fat/oil containing foods from rancidity: 
वसा एवं तेलीय खाद्य पदार्थ का विकृतगंधिता से बचाव: 
वसा एवं तेलीय खाद्य पदार्थ को विकृतगंधित होने से बचाया जा सकता है अथवा इसकी दर को कम किया जा सकता है | इसको रोकने की निम्न विधियाँ हैं |
(i) वसा एवं तेलीय खाद्य पदार्थों में एंटी-ऑक्सीडेंट (anti-oxidants) डालने से इसे विकृतगंधित होने से बचाया जा सकता है |
(ii) खाद्य पदार्थों के पैकिंग के समय बर्तन से ऑक्सीजन गैस को हटा कर नाइट्रोजन गैस से भरा जाता है | इससे विकृतगंधित होने से बचाया जा सकता है |
(iii) उपचयन की दर को कम करने के लिए वायु-मुक्त बर्तन में खाद्य पदार्थों को रखने से विकृतगंधित होने की दर को कम किया जा सकता है |
(iv) खाद्य पदार्थों को विकृतगंधिता से बचाने के लिए ऊष्मा एवं प्रकाश से दूर रखा जाता है |
(v) खाद्य पदार्थों को विकृतगंधिता से बचाने के लिए एवं उसकी दर को कम करने के लिए रेफ्रीजेरेटर ने रखा जाता है |

रासायनिक समीकरण को संतुलित करना :


रासायनिक समीकरणों के संतुलित करने की विधि :
हम यहाँ निरिक्षण विधि या हिट्स एंड ट्रायल का उपयोग करेंगे |
उदाहरण - I 
उदाहरण के लिए समीकरण  Fe + H2O → Fe3O4 + Hको लेते है |
Steps:
(i)  यह कल्पना करते हुए कि प्रत्येक सूत्र बॉक्स में है उन्हें निम्न प्रकार से बॉक्स में लिखिए | यह इसलिए कि बॉक्स के अन्दर कोई भी बदलाव नहीं होना चाहिए यह आपको ध्यान देना है |
  
(ii)  असंतुलित समीकरण में उपस्थित विभिन्न प्रकार के तत्वों के परमाणुओं का सूचि बनाइए         एवं गिनती कीजिए | इस प्रकार से
तत्व                   अभिकारक                                  उत्पाद
Fe                          1                                              3
O                           1                                              4
H                            2                                              2
 पहले ये देखिए कि किस तत्व के परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक है | यह अभिकारक या उत्पाद की ओर से हो सकता है | इसी कसौटी के उपयोग से हम पाया कि यौगिक Fe3O4 में O तत्व के सबसे अधिक 4 परमाणु हैं |
       
ऑक्सीजन के परमाणुओं की संख्या को बराबर करने के लिए, H2के साथ गुणांक 4 लगाते है जिसे इस प्रकार  4H2लिखेंगे | तब हमें यह समीकरण प्राप्त होता है |
            Fe + 4H2O → Fe3O4 + H2
(iii)  अगला अधिकतम परमाणुओं वाला तत्व Fe है | जिसे ठीक उसी नियम से संतुलित करना है |
         
अभिकारक की ओर Fe के साथ गुणांक 3 लगाने पर 3Fe प्राप्त होता है, तब समीकरण होगा |
             3Fe + 4H2O → Fe3O4 + H2
(iv)  अंत में हम दोनों पक्षों के हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करना है | अब हमें प्राप्त नए समीकरण में देखते है कि अभिकारक में हाइड्रोजन 4H2के रूप में है एवं उत्पाद में  Hके रूप में है | अभिकारक की ओर 4 × 2 = 8 परमाणु है जबकि उत्पाद की ओर सिर्फ 2 परमाणु है | तब;
              
यहाँ अब पहले की तरह बायीं ओर दो और दाई ओर 8 नहीं लगायेंगे बल्कि अब 8 और 2 से गुणांक प्राप्त करेंगे जैसे (8 ÷ 2 ) =4  तो गुणांक 4 होगा जो दाई ओर हाइड्रोजन के साथ लगाने से परिणाम 4 × 2 = 8 प्राप्त होगा | तब समीकरण होगा |
            3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2   
अब हम यह देखते है कि यह समीकरण पूरी तरह संतुलित है |
उदाहरण -II
अब हम एक नए समीकरण को निरीक्षण  विधि (हिट्स एंड ट्रायल) से हल करने की कोशिश करते करते हैं |
HNO3 + Ca(OH)2 → Ca(NO3)2 + H2O
Steps: 
(i)  ऊपर दिए समीकरण को देखने से ज्ञात होता  है कि के यौगिक के सबसे अधिक दो परमाणु/अणु है | संतुलित करने के लिए हमारे पास LHS में 1 तथा RHS में 2 अणु हैं | इसलिए 
               
यहाँ नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन संतुलित हो जायेंगे जब 2NO3 अभिकारक की ओर और NO3 उत्पाद की ओर लिखते हैं, तब समीकरण प्राप्त होगा |
 2HNO3 + Ca(OH)2 → Ca(NO3)2 + H2O
(ii)  यहाँ कैल्सियम स्वत: संतुलित हो चूका है | अब हमें केवल हाइड्रोजन अणु को संतुलित करना है | अभिकारक की ओर कुल 4 हाइड्रोजन परमाणु है और उत्पाद की ओर 2 हैं |
                
उत्पाद को 2 गुणांक के रूप में चाहिए क्योंकि (4 ÷ 2) = 2, तब समीकरण प्राप्त होगा ; 
2HNO3 + Ca (OH)2 → Ca(NO3)2 +2H2O
(iii)  इस समीकरण में अब करने के लिए कुछ नहीं है इसलिए इसमें उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की गिनती करने तथा सूची बनाने पर हमें प्राप्त होगा |
तत्व                   अभिकारक                     उत्पाद
O                           8                                  8
N                           2                                  2
Ca                         1                                  1
H                            4                                 4
इस प्रकार हम देखते है कि समीकरण संतुलित हो चूका है |
2HNO3 + Ca (OH)2 → Ca(NO3)2 +2H2O
अब आप कंकाली रासायनिक समीकरण को संतुलित करना सीख चुके होंगे | 
यदि हाँ  तो अपनी राय Feed Back में दीजिए कि यह आपको कितना helpful रहा |